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जनगणना 2027: 95 साल बाद पूछी जाएगी जाति, बैंक खाते और पलायन का कारण

जनगणना 2027: 95 साल बाद पूछी जाएगी जाति, बैंक खाते और पलायन का कारण
जनगणना 2027 में 95 साल बाद जाति से जुड़ी जानकारी पूछी जाएगी। जानिए बैंक खाते, आधार, मोबाइल, पलायन, शिक्षा और रोजगार समेत 40 सवालों में क्या शामिल है।
जनगणना 2027: 95 साल बाद फिर पूछी जाएगी जाति

जनगणना 2027: 95 साल बाद फिर पूछी जाएगी जाति, बैंक खाते और पलायन का कारण; जानिए 40 सवालों में क्या-क्या शामिल

नई दिल्ली: भारत में होने वाली जनगणना-2027 इस बार कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रही है। जनगणना के दूसरे चरण के लिए गृह मंत्रालय की ओर से जारी प्रश्नों की सूची में नागरिकों से जुड़ी कई नई जानकारियां शामिल की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार स्वतंत्र भारत में जाति से संबंधित जानकारी भी व्यापक रूप से दर्ज की जाएगी।

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले जारी प्रश्नों की सूची को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस जनगणना के जरिए देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय विविधता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जाएगी।

95 साल बाद फिर जाति की जानकारी

भारत में पिछली बार वर्ष 1931 में जातीय जनगणना हुई थी। आजादी के बाद होने वाली जनगणनाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित आंकड़े जुटाए जाते रहे हैं, लेकिन सामान्य जाति की व्यापक गणना नहीं की गई।

अब जनगणना-2027 में जाति से जुड़ा सवाल भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे देश में जातीय संरचना से जुड़े आंकड़ों को लेकर एक नया डेटाबेस तैयार होने की संभावना है।

जाति का कॉलम रहेगा खुला

रिपोर्ट के अनुसार, जनगणना के सवाल नंबर 10 में जाति के लिए पहले से तय विकल्पों वाली ड्रॉपडाउन सूची के बजाय खुला कॉलम रखा गया है।

इसमें व्यक्ति से उसकी जाति के बारे में जानकारी ली जाएगी और गणनाकर्मी उत्तरदाता द्वारा बताई गई जाति दर्ज करेगा।

हालांकि, खुले कॉलम को लेकर विशेषज्ञों के बीच सवाल भी उठ रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही जाति के अलग नाम, उपजाति या गोत्र बताए जाने की स्थिति में आंकड़ों के वर्गीकरण और विश्लेषण में चुनौती आ सकती है।

जनगणना में पूछे जाएंगे ये प्रमुख सवाल

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, जनगणना के दौरान नागरिकों से कई सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार और पहचान संबंधी जानकारियां ली जाएंगी।

  • शादी के समय व्यक्ति की उम्र
  • व्यक्ति द्वारा बताई गई राष्ट्रीयता
  • धर्म
  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/जाति
  • दिव्यांगता से संबंधित जानकारी
  • मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं
  • साक्षरता और डिजिटल साक्षरता
  • उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और फैकल्टी
  • पिछले एक वर्ष में काम किया या नहीं
  • व्यवसाय, उद्योग, व्यापार या सेवा की प्रकृति
  • काम की तलाश और काम के लिए उपलब्धता
  • जन्म स्थान
  • पिछला निवास स्थान
  • पलायन का कारण
  • कोविड वैक्सीन से संबंधित जानकारी

बैंक खाते, मोबाइल और आधार से जुड़े सवाल भी

इस बार जनगणना में पहचान से जुड़ी जानकारियों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, नागरिकों से बैंक खाते, मोबाइल, आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट से संबंधित जानकारी ली जा सकती है।

इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस होने की जानकारी भी प्रश्नावली का हिस्सा बताई गई है।

इन सवालों के शामिल होने से जनगणना का दायरा केवल परिवार और जनसंख्या संबंधी जानकारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नागरिकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की व्यापक तस्वीर तैयार करने में भी मदद मिल सकती है।

पलायन का कारण भी पूछा जाएगा

जनगणना-2027 में एक महत्वपूर्ण जानकारी पलायन के कारण से संबंधित बताई गई है।

नागरिकों से जन्म स्थान और पिछला निवास स्थान पूछने के साथ यह भी जानने की कोशिश की जाएगी कि उन्होंने अपना घर क्यों छोड़ा। रोजगार, शिक्षा, विवाह या अन्य कारणों से होने वाले पलायन की जानकारी देश में आंतरिक प्रवासन की स्थिति को समझने में उपयोगी हो सकती है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

जाति से जुड़े सवालों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जाति संबंधी सवालों में बिहार और तेलंगाना में किए गए सर्वेक्षणों की तरह पहले से तैयार सूची का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था।

उनका कहना है कि खुले विकल्प के कारण जाति संबंधी आंकड़ों के संग्रह और वर्गीकरण को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है जनगणना-2027?

जनगणना किसी भी देश के लिए नीति निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार होती है। इससे आबादी की संख्या के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार, भाषा, आवास, सामाजिक संरचना और पलायन जैसी स्थितियों की तस्वीर सामने आती है।

जनगणना-2027 में यदि जाति, डिजिटल साक्षरता, रोजगार, पलायन और पहचान से जुड़ी अतिरिक्त जानकारियां व्यवस्थित रूप से जुटाई जाती हैं, तो आने वाले वर्षों में सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

नोट: जनगणना के प्रश्नों और प्रक्रिया से संबंधित अंतिम आधिकारिक जानकारी के लिए भारत सरकार/गृह मंत्रालय की अधिसूचना को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।

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