हिण्डौन विधायक अनिता जाटव फिर पहुंचीं संत रामपाल के पास, बोलीं- पाइप और मोटर तो पहुंच गई, अब पाइप लाइन लगवाने में मदद करें
हिण्डौन सिटी। हिण्डौन विधानसभा क्षेत्र में जल निकासी और पेयजल से जुड़ी समस्याओं को लेकर विधायक अनिता जाटव एक बार फिर संत रामपाल के पास पहुंचीं। विधायक ने क्षेत्र की समस्या को लेकर संत रामपाल से सहयोग की अपील की। इस दौरान विधायक ने बताया कि पाइप और मोटर तो पहुंच चुकी है, लेकिन अब पाइप लगाने का काम बाकी है।
विधायक ने हाथ जोड़कर पाइप लाइन लगवाने के लिए सहयोग करने का आग्रह किया। विधायक के अनुसार, इस पर संत रामपाल ने कहा कि “आप जैसी विधायक होनी चाहिए, जो जनता के बारे में भी सोचे।” इसके बाद उन्होंने विधायक से काम शुरू करवाने की बात कहते हुए खर्च देने की बात कही।
पहले भी विधायक के आग्रह पर पहुंची थी पाइप और मोटर
यह पहली बार नहीं है जब हिण्डौन क्षेत्र की जल निकासी समस्या को लेकर विधायक अनिता जाटव ने संत रामपाल से सहयोग मांगा हो।
इससे पहले भी विधायक के कहने पर संत रामपाल की ओर से पाइप और मोटर उपलब्ध कराई गई थीं। इनका उपयोग क्षेत्र में पानी निकासी की समस्या के समाधान के लिए किया जाना था।
अब एक बार फिर विधायक के संत रामपाल के पास पहुंचने से यह मामला चर्चा में आ गया है। पहले पाइप और मोटर उपलब्ध कराए जाने के बाद अब विधायक ने पाइप लाइन लगाने के लिए सहयोग मांगा है।
यानी मामला केवल पाइप और मोटर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे काम को जमीन पर पूरा कराने का सवाल सामने है।
विधायक ने कहा- पाइप और मोटर पहुंच गई, अब पाइप लगवाना है
मुलाकात के दौरान विधायक अनिता जाटव ने बताया कि पहले की मांग के अनुसार पाइप और मोटर पहुंच चुकी हैं, लेकिन उन्हें लगाने और पाइप लाइन का काम पूरा कराने की आवश्यकता है।
विधायक ने संत रामपाल से इस काम में सहयोग का आग्रह किया। विधायक के अनुसार, संत रामपाल ने काम शुरू करवाने के लिए आर्थिक सहयोग देने की बात कही।
हालांकि, इस बातचीत और आर्थिक सहयोग की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस हिस्से को विधायक के बताए अनुसार ही देखा जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल- सरकारी व्यवस्था आखिर किस लिए?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब हिण्डौन की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है।
जब जनता से जुड़ी जल निकासी जैसी मूलभूत समस्या के समाधान के लिए विधायक को निजी स्तर पर किसी संत से सहयोग मांगना पड़ रहा है, तो सरकारी स्तर पर इसकी व्यवस्था क्यों नहीं हो रही?
क्या हिण्डौन विधानसभा क्षेत्र की ऐसी समस्याओं के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त बजट और योजनाएं नहीं हैं?
क्या इस तरह के जनहित के कार्य विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत नहीं कराए जा सकते?
और अगर किसी विशेष तकनीकी या प्रशासनिक कारण से यह कार्य विधायक कोष से नहीं कराया जा सकता, तो इसकी वजह जनता के सामने स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?
हर साल विधायक को मिलता है करोड़ों का विकास फंड
राजस्थान सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत प्रत्येक विधायक के विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जनोपयोगी कार्य करवाए जाते हैं।
सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस योजना की राशि को वर्ष 2021-22 से बढ़ाकर ₹5 करोड़ प्रतिवर्ष प्रति विधायक किया गया था।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ही विधानसभा क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्य करवाना है। ऐसे में हिण्डौन में पानी निकासी, पाइप लाइन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामलों में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि कौन-कौन से कार्य विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत करवाए जा सकते हैं और किन कार्यों के लिए अन्य विभागों की जिम्मेदारी तय है।
क्या सरकार हिण्डौन के मुद्दों पर गंभीर है?
हिण्डौन विधानसभा क्षेत्र में जल निकासी, सड़क, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
ऐसे में जनता का सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पाइप और मोटर कौन देगा।
असल सवाल यह है कि जनता की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अगर किसी क्षेत्र में पानी निकासी के लिए पाइप और मोटर की जरूरत है, तो क्या इसके लिए सरकारी विभागों के पास कोई योजना नहीं है? क्या विधायक निधि से अनुमत कार्य होने पर उसका प्रस्ताव बनाकर उसे सरकारी प्रक्रिया के तहत पूरा नहीं कराया जा सकता?
और यदि ऐसा संभव नहीं है तो सरकार और प्रशासन को जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि समस्या के समाधान के लिए क्या योजना बनाई गई है।
निजी सहयोग बनाम सरकारी जिम्मेदारी
संत रामपाल की ओर से पहले पाइप और मोटर उपलब्ध कराए जाने तथा अब विधायक के आग्रह पर आगे आर्थिक सहयोग की बात सामने आने से एक अलग बहस भी शुरू हो गई है।
निजी या सामाजिक सहयोग से जनता की समस्या का समाधान होना अच्छी बात है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए जनता को बार-बार निजी सहयोग पर निर्भर रहना चाहिए?
सरकार और स्थानीय प्रशासन के पास विकास योजनाएं और बजट हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि हिण्डौन विधानसभा क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनके लिए सरकारी स्तर पर स्थायी समाधान तैयार किया जाए।
जनता के सामने अब ये सवाल
- हिण्डौन में जल निकासी के इस कार्य की कुल लागत कितनी है?
- क्या यह कार्य विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना से कराया जा सकता है?
- यदि नहीं, तो इसकी वजह क्या है?
- संबंधित विभाग ने अब तक इस समस्या के समाधान के लिए कितना बजट खर्च किया?
- पहले उपलब्ध कराई गई पाइप और मोटर का उपयोग कब और कहां किया गया?
- अब पाइप लाइन लगाने का काम कब शुरू होगा?
- क्या प्रशासन इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक योजना जारी करेगा?
हिण्डौन की जनता को अब आश्वासन से ज्यादा काम का इंतजार है। पाइप और मोटर पहुंचने के बाद अगला कदम पाइप लाइन का काम पूरा करना है। देखना होगा कि यह काम सरकारी स्तर पर पूरा होता है या फिर एक बार फिर निजी सहयोग का सहारा लेना पड़ता है।
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