Hindaun Deputy Chairman Election 2026: 22 सितंबर को उपसभापति का चुनाव, 39 निर्दलीय पार्षदों पर टिकी नजर
हिण्डौन सिटी: हिण्डौन नगर परिषद में सभापति पद की चुनाव प्रक्रिया के बाद अब राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र उपसभापति पद बन गया है। निकाय चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 22 सितंबर 2026 को उपसभापति पद के लिए चुनाव प्रक्रिया प्रस्तावित है। ऐसे में 60 सदस्यीय नगर परिषद में संख्या बल और पार्षदों के समर्थन को लेकर गतिविधियां तेज हैं।
हिण्डौन के चुनाव परिणाम में 39 निर्दलीय, 12 भाजपा और 9 कांग्रेस पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इस संख्या के कारण उपसभापति चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। हालिया रिपोर्टों में भी हिण्डौन के 60 वार्डों में 39 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत की जानकारी सामने आई है।
उपसभापति के लिए 31 पार्षदों का समर्थन अहम
60 सदस्यीय नगर परिषद में बहुमत का आंकड़ा 31 है। भाजपा के पास अपने 12 निर्वाचित पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 9 पार्षद हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक समीकरण में निर्दलीय पार्षद महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।
- कुल वार्ड: 60
- निर्दलीय: 39
- भाजपा: 12
- कांग्रेस: 9
- बहुमत का आंकड़ा: 31
- उपसभापति चुनाव: 22 सितंबर 2026
भाजपा खेमे में उम्मीदवार को लेकर चर्चा
उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार भाजपा की ओर से पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश जारी है और इसमें कुछ निर्दलीय पार्षद भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसी बीच उपसभापति पद के संभावित उम्मीदवार को लेकर अलग-अलग नामों की चर्चा सामने आ रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भाजपा से निर्वाचित कुछ पार्षद पार्टी के निर्वाचित पार्षद को ही उम्मीदवार बनाए जाने के पक्ष में हैं। हालांकि उपसभापति पद के लिए भाजपा अथवा किसी अन्य समूह के आधिकारिक उम्मीदवार की अंतिम पुष्टि होने तक संभावित नामों को केवल दावेदारी या राजनीतिक चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
39 निर्दलीय पार्षद क्यों हैं महत्वपूर्ण?
इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नगर परिषद की संरचना है। किसी एक दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। 39 निर्दलीय पार्षद होने के कारण उपसभापति पद के लिए बनने वाला समर्थन समीकरण केवल भाजपा और कांग्रेस के अपने पार्षदों तक सीमित नहीं रहेगा।
यही कारण है कि चुनाव से पहले पार्षदों के बीच सहमति बनाने और समर्थन जुटाने की गतिविधियों पर स्थानीय राजनीतिक हलकों की नजर है।
सभापति चुनाव के बाद अब उपसभापति पर नजर
नगर परिषद चुनाव परिणाम के बाद बोर्ड गठन को लेकर निर्दलीय पार्षद पहले ही केंद्र में आ गए थे। चुनाव परिणाम के बाद प्रकाशित रिपोर्टों में भी निर्दलीयों के बड़े संख्या बल और बोर्ड गठन में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया था। अब उपसभापति चुनाव में भी यही संख्या महत्वपूर्ण बनी हुई है।
2005 में अलग-अलग दलों के पास रहे थे दोनों पद
उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट में हिण्डौन की पुरानी नगर निकाय राजनीति का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि वर्ष 2005 में भाजपा के बृजेंद्र आर्य अध्यक्ष बने थे, जबकि कांग्रेस के भगवान सहाय शर्मा ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया था।
यह ऐतिहासिक संदर्भ बताता है कि नगर निकाय में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद हमेशा एक ही राजनीतिक खेमे के पास रहें, यह आवश्यक नहीं है। हालांकि 2026 की परिस्थितियां और वर्तमान पार्षद संख्या अलग हैं, इसलिए पुराने चुनाव को मौजूदा परिणाम का संकेत नहीं माना जा सकता।
22 सितंबर को साफ होगी तस्वीर
उपसभापति पद को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच अंतिम स्थिति चुनाव प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। उम्मीदवारों, समर्थन और मतदान से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने पर KarauliTak इस रिपोर्ट को अपडेट करेगा।
स्रोत एवं पारदर्शिता: यह रिपोर्ट उपलब्ध स्थानीय समाचार रिपोर्टों और प्रकाशित नगर परिषद चुनाव परिणामों के आधार पर तैयार की गई है। संभावित उम्मीदवारों या पार्षदों के आंतरिक मतभेद से संबंधित अपुष्ट राजनीतिक चर्चाओं को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। अंतिम उम्मीदवार और चुनाव परिणाम की आधिकारिक पुष्टि के बाद जानकारी अपडेट की जानी चाहिए।
रिपोर्ट: Narendra Singh | KarauliTak
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