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राजस्थान के 48 लाख बैंक खातों में 'सोया धन', ₹3,120 करोड़ पर किसी ने नहीं किया दावा

राजस्थान के 48 लाख बैंक खातों में 'सोया धन', ₹3,120 करोड़ पर किसी ने नहीं किया दावा
राजस्थान के 48 लाख से ज्यादा बैंक खाते 10 साल से निष्क्रिय बताए गए हैं। जानिए SBI-PNB समेत बैंकों में जमा सोया धन और दावा करने का आसान तरीका

राजस्थान के 48 लाख बैंक खाते निष्क्रिय, ₹3,120 करोड़ पर दावा नहीं

जयपुर: राजस्थान में लाखों बैंक खातों में जमा रकम लंबे समय से बिना किसी दावे के पड़ी होने की बात सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट में 48.12 लाख से ज्यादा बैंक खातों के 10 साल या उससे अधिक समय से निष्क्रिय होने और करीब ₹3,120.45 करोड़ की राशि पर दावा नहीं किए जाने का उल्लेख है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आपके परिवार के किसी सदस्य का पुराना बैंक खाता है, जिसके बारे में अब किसी को जानकारी नहीं है, तो क्या उस पैसे को वापस पाया जा सकता है? जवाब है हां। RBI के नियमों के तहत पात्र खाताधारक या वैध उत्तराधिकारी संबंधित बैंक से रकम का दावा कर सकता है।

बड़ी बात: बैंक में पैसा 10 साल तक अनक्लेम्ड रहने के बाद RBI के Depositor Education and Awareness (DEA) Fund में ट्रांसफर किया जा सकता है, लेकिन इससे खाताधारक या वैध वारिस का दावा खत्म नहीं होता।

राजस्थान के 48 लाख से ज्यादा बैंक खाते क्यों पड़े हैं निष्क्रिय?

पुराने बैंक खातों के निष्क्रिय होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में खाताधारक की मृत्यु के बाद परिवार को खाते की जानकारी नहीं होती, जबकि कुछ खातों में लंबे समय तक कोई लेनदेन नहीं होता।

इसके अलावा दूसरे शहर या विदेश में नौकरी करने वाले लोग पुराने खाते का इस्तेमाल बंद कर देते हैं। शादी के बाद पता बदलना, पुराने दस्तावेज अपडेट नहीं होना और बैंक खाते में नॉमिनी की जानकारी परिवार तक नहीं पहुंचना भी महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।

सबसे ज्यादा 'सोया धन' SBI और PNB में बताया गया

उपलब्ध बैंकवार आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में निष्क्रिय खातों से जुड़ी जमा राशि में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा बताई गई है।

रैंक बैंक बताई गई राशि
1 स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ₹980 करोड़
2 पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ₹510 करोड़
3 बैंक ऑफ बड़ौदा ₹440 करोड़
4 यूको बैंक (UCO Bank) ₹280 करोड़
5 एचडीएफसी बैंक ₹195 करोड़

टॉप-5 बैंकों में कितनी राशि?

दिए गए बैंकवार आंकड़ों को जोड़ने पर इन पांच बैंकों में कुल राशि करीब ₹2,405 करोड़ बैठती है। यह ₹3,120.45 करोड़ के बताए गए कुल आंकड़े का करीब 77 प्रतिशत है।

यानी उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केवल पांच प्रमुख बैंकों में ही निष्क्रिय जमा का बड़ा हिस्सा केंद्रित बताया गया है। हालांकि इन बैंकवार आंकड़ों को संबंधित बैंक या आधिकारिक राज्यवार डेटा से प्रकाशित करने से पहले सत्यापित करना जरूरी है।

5 साल में निष्क्रिय खातों की संख्या कितनी बढ़ी?

आपके दिए गए आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार 2021-22 में निष्क्रिय खातों की संख्या करीब 31.10 लाख थी। 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 48.12 लाख बताई गई है।

यानी इस अवधि में निष्क्रिय खातों की संख्या करीब 17.02 लाख बढ़ी। प्रतिशत के हिसाब से यह लगभग 54.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

निष्क्रिय खातों का ट्रेंड

वित्त वर्ष निष्क्रिय खाते
2021-22 31.10 लाख
2022-23 36.45 लाख
2023-24 41.20 लाख
2024-25 45.15 लाख
2025-26 48.12 लाख

पुरुषों और महिलाओं के कितने खाते बताए गए?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल निष्क्रिय खातों में करीब 62 प्रतिशत खाते पुरुषों के और 38 प्रतिशत खाते महिलाओं के बताए गए हैं।

48.12 लाख खातों पर यह अनुपात लागू करें तो पुरुष खातों की संख्या लगभग 29.83 लाख और महिलाओं के खातों की संख्या करीब 18.28 लाख बैठती है।

हालांकि यह आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्ट में दिए प्रतिशत पर आधारित गणना है, इसलिए इसे स्वतंत्र आधिकारिक बैंकिंग डेटाबेस का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

जयपुर और शेखावाटी में ज्यादा खाते होने की बात

उपलब्ध जानकारी के अनुसार जयपुर के शहरी और अर्धशहरी इलाकों में ऐसे खातों की संख्या अधिक बताई गई है। इसके अलावा जोधपुर, उदयपुर, झुंझुनूं और सीकर में भी बड़ी संख्या में पुराने निष्क्रिय खातों का उल्लेख किया गया है।

शेखावाटी क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोगों के दूसरे राज्यों और विदेशों में रोजगार के लिए जाने के कारण पुराने बैंक खातों में लेनदेन बंद होने की संभावना बताई गई है।

10 साल तक लेनदेन नहीं होने पर बैंक का पैसा कहां जाता है?

RBI के नियमों के अनुसार बैंक में कोई जमा खाता लगातार 10 साल या उससे अधिक समय तक निष्क्रिय या राशि 10 साल या उससे अधिक समय तक अनक्लेम्ड रहने पर पात्र राशि को Depositor Education and Awareness Fund (DEA Fund) में ट्रांसफर किया जाता है।

RBI के अनुसार ट्रांसफर के समय संबंधित जमा राशि के साथ लागू accrued interest भी DEA Fund में ट्रांसफर किया जाता है।

क्या 10 साल बाद पैसा वापस मिल सकता है?

हां। DEA Fund में पैसा ट्रांसफर होने के बाद भी ग्राहक या मृत खाताधारक का वैध कानूनी वारिस संबंधित बैंक से दावा कर सकता है।

RBI के FAQ के अनुसार ग्राहक या कानूनी वारिस द्वारा दावा किए जाने पर बैंक राशि का भुगतान करता है और बाद में DEA Fund से उसके बराबर राशि की वापसी का दावा करता है।

UDGAM Portal से अपना पुराना बैंक खाता कैसे खोजें?

RBI ने अनक्लेम्ड डिपॉजिट खोजने के लिए UDGAM (Unclaimed Deposits – Gateway to Access inforMation) पोर्टल बनाया है।

UDGAM का इस्तेमाल एक जगह से कई बैंकों में मौजूद अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी खोजने के लिए किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि UDGAM खुद पैसा जारी नहीं करता। सफल खोज के बाद वास्तविक क्लेम संबंधित बैंक से करना होता है।

UDGAM पर पैसा खोजने के स्टेप्स

  1. RBI के UDGAM पोर्टल पर जाएं।
  2. अपना नाम और मोबाइल नंबर देकर रजिस्ट्रेशन करें।
  3. खाताधारक का नाम और संबंधित बैंक चुनें।
  4. उपलब्ध पहचान संबंधी जानकारी दर्ज करें।
  5. सर्च रिजल्ट में अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी देखें।
  6. जरूरत होने पर UDRN/Reference Number नोट करें।
  7. इसके बाद संबंधित बैंक की शाखा या बैंक द्वारा बताई गई प्रक्रिया से क्लेम करें।

किस-किस दस्तावेज की जरूरत पड़ सकती है?

क्लेम की वास्तविक प्रक्रिया बैंक और मामले की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। आम तौर पर खाताधारक की पहचान, बैंक खाते से संबंधित रिकॉर्ड और आवश्यक KYC दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

यदि खाताधारक की मृत्यु हो चुकी है तो बैंक वैध उत्तराधिकारी से अतिरिक्त दस्तावेज मांग सकता है। इसलिए किसी एजेंट को पैसा देने के बजाय सीधे संबंधित बैंक से क्लेम प्रक्रिया की जानकारी लेना बेहतर है।

एक जरूरी बात जो हर परिवार को पता होनी चाहिए

घर में माता-पिता, दादा-दादी या अन्य परिवार के सदस्यों के पुराने बैंक खातों की जानकारी सुरक्षित रखें। नॉमिनी, मोबाइल नंबर, पता और KYC जानकारी समय-समय पर अपडेट रखने से भविष्य में वारिसों को पैसा खोजने में परेशानी कम हो सकती है।

क्या UDGAM Portal से सीधे पैसा मिलता है?

नहीं। UDGAM केवल अनक्लेम्ड जमा की जानकारी खोजने में मदद करता है। RBI के अनुसार राशि का दावा संबंधित बैंक से ही किया जाता है।

ठगी से रहें सावधान

अनक्लेम्ड बैंक खाते की जानकारी के नाम पर साइबर ठगी भी हो सकती है। कोई भी व्यक्ति अगर बैंक का पैसा वापस दिलाने के नाम पर OTP, ATM PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड की गोपनीय जानकारी मांगे तो ऐसी जानकारी साझा न करें।

  • OTP किसी के साथ शेयर न करें।
  • ATM PIN और UPI PIN न बताएं।
  • नेट बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें।
  • क्लेम के नाम पर अनजान लिंक पर भुगतान न करें।
  • केवल संबंधित बैंक की आधिकारिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करें।

निष्कर्ष

राजस्थान में लाखों पुराने बैंक खातों में जमा रकम को लेकर सामने आए ये आंकड़े परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हैं। अगर आपके परिवार में किसी सदस्य का पुराना बैंक खाता है और लंबे समय से उसका इस्तेमाल नहीं हुआ है, तो उसकी जानकारी जरूर जांचें।

RBI का UDGAM Portal अनक्लेम्ड डिपॉजिट खोजने का उपयोगी माध्यम है। पैसा मिलने पर दावा संबंधित बैंक के जरिए किया जाता है। सबसे जरूरी बात यह है कि 10 साल बाद पैसा खत्म नहीं होता और पात्र खाताधारक या वैध वारिस दावा कर सकता है।

FAQs: राजस्थान के निष्क्रिय बैंक खाते

1. राजस्थान में कितने बैंक खाते निष्क्रिय बताए गए हैं?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 10 साल या उससे अधिक समय से निष्क्रिय बैंक खातों की संख्या करीब 48.12 लाख बताई गई है।

2. 10 साल बाद बैंक खाते का पैसा वापस मिल सकता है?

हां। पात्र खाताधारक या मृत खाताधारक का वैध कानूनी वारिस जरूरी प्रक्रिया पूरी करके संबंधित बैंक से अनक्लेम्ड राशि का दावा कर सकता है।

3. UDGAM Portal पर पैसा कैसे खोजें?

RBI के UDGAM Portal पर रजिस्ट्रेशन करके खाताधारक का नाम, बैंक और उपलब्ध पहचान संबंधी जानकारी के आधार पर अनक्लेम्ड डिपॉजिट खोजी जा सकती है। क्लेम संबंधित बैंक से करना होता है।

डेटा और स्रोत नोट: RBI के आधिकारिक नियमों के अनुसार 10 साल या उससे अधिक समय से अनक्लेम्ड/ निष्क्रिय जमा राशि DEA Fund में ट्रांसफर की जाती है और खाताधारक या वैध कानूनी वारिस संबंधित बैंक के माध्यम से दावा कर सकता है। राजस्थान के 48.12 लाख खाते, ₹3,120.45 करोड़ और बैंकवार राशि के आंकड़े इस खबर में उपलब्ध रिपोर्ट/इनपुट के आधार पर दिए गए हैं और इन्हें प्रकाशित करने से पहले मूल राज्यवार दस्तावेज से सत्यापित करना उचित है।

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